उत्तर-कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड की अपेक्षा अधिक खतरनाक होती है क्योंकि यह हीमोग्लोबिन
के साथ ऑक्सीजन की अपेक्षा अधिक प्रबलता से जुड़कर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है, जो ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन
से 300 गुना अधिक स्थायी संकुल होता है। जब रक्त में कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन की मात्रा 3-4 प्रतिशत तक पहुँच जाती है,
तो रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है। ऑक्सीजन की इस कमी से सिरदर्द, नेत्रदृष्टि की कमी, तंत्रकीय
आवेग में न्यूनता, हृदयवाहिका में तंत्र अव्यवस्था आदि विसंगतियाँ हो जाती हैं। इसी कारण धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए
हानिकारक है। गर्भवती महिलाओं के रक्त में CO की मात्रा बढ़ने से समय पूर्व जन्म, गर्भपात तथा बच्चों में विकृति हो जाती है। इसकी 1300 ppm सांद्रता आधे घण्टे में प्राणघातक हो जाती है।
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