उत्तर :- क्रेब्स चक्र-ग्लाइकोलिसिस के दौरान बने पाइरुविक अम्ल को पहले कोशिकाद्रव्य में ही ऐसीटिल को-
एन्जाइम-A में बदला जाता है, जिसका अगला ऑक्सीकरण माइटोकॉण्ड्रिया के क्रिस्टी झिल्ली में CO, एवं HO में होता
है। माइटोकॉण्ड्रिया में होने वाले ऐसीटिल को-एन्जाइम-A ऑक्सीकरण को ही क्रेब्स चक्र या ‘ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल'
चक्र कहते हैं।

क्रेब्स चक्र किसे कहते हैं ? इस क्रिया को विस्तार से समझाते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डालिए।
क्रेब्स चक्र की क्रिया-विधि-क्रेब्स चक्र में निम्नलिखित क्रियाएँ होती हैं-
(1) ऐसीटिल को-एन्जाइम-A, ऑक्जेलो ऐसीटिक अम्ल तथा जल से क्रिया करके साइट्रिक अम्ल बना देता है।
को-एन्जाइम मुक्त होकर फिर से नया ऐसीटिल को-एन्जाइम-A बनाता है।
(2) साइट्रिक अम्ल से जल निकलकर इसे सिस-ऐकोनाइटिक अम्ल में बदल देता है। इसके बाद यह पुनः जल
का एक अणु ग्रहण करके आइसोसाइट्रिक अम्ल बना देता है।
(3) यह आइसोसाइट्रिक अम्ल 2 हाइड्रोजन परमाणु NADP को देकर ऑक्जेलो सक्सिनिक अम्ल बना देता है।
(4) ऑक्जेलो सक्सिनिक अम्ल CO, को त्याग कर -कीटो ग्लूटेरिक अम्ल बना देता है।
(5) a-कीटोग्लूटेरिक अम्ल एक अणु CO, तथा 2 परमाणु H, को त्यागकर सक्सिनिल को-एन्जाइम-ए बना
a-
देता है।
-
(6) सक्सिनिल को-एन्जाइम-ए थायोकाइनेज प्रकीण्व की उपस्थिति में सक्सिनिक अम्ल बना देता है और GTP
के अणु का संश्लेषण होता है।
(7) सक्सिनिक अम्ल 2 हाइड्रोजन परमाणु त्यागकर फ्यूमेरिक अम्ल तथा फ्यूमेरिक अम्ल से क्रिया करके मैलिक
अम्ल बना देता है।
(8) मैलिक अम्ल 2 हाइड्रोजन परमाणु त्यागकर फ्यूमेरिक अम्ल तथा फ्यूमेरिक अम्ल से क्रिया करके मैलिक अम्ल
बना देता है।
(9) मैलिक अम्ल 2 हाइड्रोजन परमाणुओं को त्यागकर फिर से ऑक्जेलो ऐसीटिक अम्ल बना देता है जो पुनः
ऐसीटिल को-एन्जाइम-Aसे क्रिया करता है, इस प्रकार क्रेब्स चक्र में रासायनिक क्रियाएँ एक चक्र के रूप में होती रहती हैं।
क्रेब्स चक्र का महत्व :-
(1) क्रेब्स चक्र में उत्पन्न ऊर्जा से ATP का संश्लेषण होता है, जिसका उपयोग जैविक कार्यों के समय ऊर्जा प्राप्ति
के लिए किया जाता है।
(2) इसमें कई मध्यवर्ती उत्पाद बनते हैं, जो दूसरी क्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण होते हैं
(3) यह कोशिकीय ऊर्जा को व्यवस्थित करता है। अन्यथा यह ऊर्जा कोशिका को नष्ट कर सकती है।
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