DNA द्विगुणन को समझाइए ।
DNA द्विगुणन को समझाइए ।
DNA द्विगुणन को समझाइए ।
उत्तर - DNA की श्रृंखला अपने ही समान दूसरी श्रृंखला बना सकती
है, DNA की इसी क्रिया को DNA द्विगुणन कहते हैं। वाटसन एवं क्रिक
के अनुसार द्विगुणन के समय DNA की दोनों शृंखलाओं के क्षारों के हाइड्रोजन
बन्ध टूट जाते हैं फलतः दोनों शृंखलाएँ अलग हो जाती हैं। प्रत्येक कोशिका
के कोशिकाद्रव्य तथा केन्द्रक में स्वतन्त्र न्यूक्लियोटाइड्स पाये जाते हैं, ये
DNA की इकहरी श्रृंखला के न्यूक्लियोटाइड के साथ जोड़ी बना देते हैं,
स्वतन्त्र ऐडीनीन न्यूक्लियोटाइड, खुली श्रृंखला के थायमीन न्यूक्लियोटाइड
और ग्वानीन, साइटोसिन न्यूक्लियोटाइड से जुड़ते हैं। इसके बाद शर्करा अणु
अपने फॉस्फेट घटक से जुड़कर खुली शृंखला के ही समान नई श्रृंखला बना देते हैं।
इस प्रकार प्रत्येक खुली शृंखला पुनः नया कुण्डलित DNA बना देती है।
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