उत्तर-औषधि एवं ऐल्कोहॉल व्यसन से ग्रसित व्यक्ति का अपनी पूर्व अवस्था, अर्थात् स्वस्थ अवस्था या सामान्य स्वास्थ्य वाली अवस्था में वापस आ जाना ही पुनर्वासन कहलाता है। पुनर्वासन हेतु व्यक्ति को नशाखोरी की आदत को धीरे-धीरे समाप्त करने का प्रयास किया जाता है। व्यक्ति में औषधि व्यसन के प्रत्याहारी लक्षणों (Withdrawal symptoms) के उपचार हेतु प्रारंभ में उन्हें निस्तब्धकारी औषधियाँ (Tranquillizers)
देकर ठीक किया जाता है, परन्तु यह औषधि निर्भरता का अल्पावधि उपचार (Short term treatment) ही होता है। व्यसन से ग्रसित व्यक्ति के दीर्घकालीन उपचार (Long term treatment) हेतु औषधि उपचार के साथ - साथ व्यवहारात्मक शिक्षा भी देना आवश्यक होता है, ताकि व्यक्ति इन औषधियों के कुप्रभावों को समझ सके तथा स्वयं ही औषधि निर्भरता छोड़ने का प्रयास करने लगे। इस कार्य हेतु सम्बन्धियों (Relatives), दोस्तों एवं चिकित्सकों के द्वारा उनका मनोवैज्ञानिक (Psychological) एवं सामाजिक उपचार (Therapy) आवश्यक होता है। लोगों को ऐसे व्यक्तियों के साथ सहानुभूति रखते हुए उन्हें इनके कुप्रभावों को जानकारी देनी चाहिए
तथा उनकी औषधि निर्भरता को धीरे-धीरे समाप्त करना चाहिए। औषधि व्यसन से ग्रसित व्यक्ति के पुनर्वासन के दौरान व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में भोजन, विटामिन्स, इलेक्ट्रोलाइट्स (Electrolytes) आदि पदार्थ भी देने चाहिए। चूँकि सामान्यतः यह देखा गया है कि व्यसन से ग्रसित कोई व्यक्ति अचानक औषधि सेवन बन्द कर देता है तो उसके मस्तिष्क में CAMP (Cyclic adenosine monophosphate) का स्तर बढ़ जाता है जो कि एक प्रत्याहारी लक्षण (Withdrawal symptom) है। ऐसे रोगी को विटामिन-C देने से CAMP का स्तर नियंत्रित रहता है तथा व्यक्ति में प्रत्याहारी लक्षण उत्पन्न नहीं हो पाते हैं।
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