प्रश्न :- वह कौन-सी क्रियाविधि है जिससे एड्स विषाणु संक्रमित व्यक्ति के प्रतिरक्षा तंत्र का ह्रास करता है?
वृहद् भक्षकाणु (मेक्रोफेज) में प्रवेश करता है जहाँ उसका आर. एन. ए. जीनोम, विलोम ट्रांसक्रिप्टेज एन्जाइम
(Reverse transcriptase enzyme) की सहायता से प्रतिकृतीकरण (Replication) द्वारा विषाणु डी. एन. ए.
(Viral DNA) बनता है। यह विषाणु DNA परपोषी कोशिका के डी. एन. ए. में समाविष्ट होकर संक्रमित
कोशिकाओं को विषाणु कण पैदा करने का निर्देश देता है । वृहद् भक्षक विषाणु उत्पन्न करना जारी रखते हैं और
एक HIV फैक्टरी की तरह कार्य करते हैं। इसके साथ ही HIV सहायक टी-लसीकाणुओं (TH) में घुस जाता
है, प्रतिकृति बनाता है और संतति विषाणु पैदा करता है।
यह क्रम बार-बार दोहराया जाता है। जिसकी वजह से
संक्रमित व्यक्ति के शरीर में सहायक टी-लसिकाणुओं की संख्या में उत्तरोत्तर कमी होती है। इस अवधि के दौरान
बार-बार बुख र एवं दस्त आते हैं तथा वजन घटता है । अचानक टी-लसिकाणुओं की संख्या में गिरावट के कारण
व्यक्ति जीवाणुओं, विशेष रूप से माइक्रोबैक्टीरियम, विषाणुओं, कवकों यहाँ तक कि टॉक्सोप्लाज्मा जैसे
परजीवियों के संक्रमण का शिकार हो जाता है। रोगी में इससे प्रतिरक्षा न्यूनता हो जाती है और वह इन संक्रमणों
से अपनी रक्षा करने में असमर्थ हो जाता है।
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