ग्रीन हाउस प्रभाव से आप क्या समझते हैं ?
में की मात्रा में वृद्धि तथा इससे तापमान में होने वाली वृद्धि को सर्वप्रथम अमेरिकी वैज्ञानिक रोजर रेवेल 1957 ने ग्रीन हाउस प्रभाव नाम दिया।
पृथ्वी की सतह पर गैसों का आवरण ग्रीन हाउस के शीशे जैसा कार्य करता है अर्थात् यह सौर विकिरण को तो पृथ्वी पर जाने देता है परन्तु लंबी तरंगदैर्घ्य के विकिरण को अवशोषित कर लेता है। प्राकृतिक ग्रीन हाउस
प्रभाव पृथ्वी की सतह के तापमान को 15°C पर गर्म करता है ग्रीन हाउस गैसों की अनुपस्थिति में पृथ्वी का तापमान 20°C गिर सकता है। परन्तु औद्योगिक क्रान्ति के बाद वायुमंडलीय CO2, CFC, CH4, अन्य गैसों की मात्रा में ये अत्यधिक वृद्धि।
ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण-1. वृक्षों के अत्यधिक कटाई से CO, गैस की वातावरण में वृद्धि होना।
2. जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) आदि के आरंभिक या पूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइक्साइड एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइडों की मात्रा में वृद्धि में।
3. रेफ्रिजिरेटरों एवं एयर कंडीशनरों में एरोसोल का उपयोग अग्निशमन यंत्रों तथा फोम के उपयोग से क्लोरोफ्लोरो कार्बन का वातावरण में एकत्रित होना।
4. अनेक जैविक प्रक्रियाओं, कृषि कार्यों एवं अपशिष्टों के सड़ने से ग्रीन हाउस गैसों का वातावरण में एकत्रित होना।
ग्लोबल वार्मिंग के विनाशकारी परिणाम-(1) पृथ्वी का तापमान बढ़ने से पानी के वाष्पीकरण की दर बढ़ेगी जिससे उपलब्ध पानी में कमी आयेगी। (2) पृथ्वी का तापमान बढ़ने से ध्रुवों की बर्फ पिघलेगी जिससे समुद्र का जल स्तर बढ़ने से तटीय आबादी को, जीवन का खतरा हो जायेगा। (3) पेड़ पौधों एवं जंतुओं की मृत्यु दर बढ़ जायेगी। (4) जल एवं वायु प्रदूषण में तेजी से वृद्धि होगी। (5) असामयिक वृष्टि, अतिवृष्टि एवं अनावृष्टि एवं बाढ़ की संभावनाएँ बढ़ जायेंगी।
ग्लोबल वार्मिंग से बचने के उपाय-(1) वृक्षों के कटाई को प्रतिबंधित करना चाहिए तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण करना चाहिए। (2) जीवाश्म ईंधन को मितव्ययिता से तथा पूर्णदहन हो, ऐसा उपयोग करना चाहिए।
(3) क्लोरो फ्लोरो कार्बन को पूर्णतः प्रतिबंधित कर देना चाहिए। (4) रासायनिक खादों के प्रयोग को बंद करके जैविक खादों के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिये।
(5) अधिकाधिक वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करना चाहिए।
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