उत्तर- जब कभी किसी व्यक्ति में गुणसूत्रीय विकृति, के कारण 21 वें जोड़े कायिक गुणसूत्र में दो के स्थान पर तीन गुणसूत्र हो तब इस प्रकार संलक्षण (सिण्ड्रोम) बनते हैं। ऐसे व्यक्ति में 45 +2=47 गुणसूत्र होते हैं। ऐसे व्यक्ति का ललाट चौड़ा, गर्दन छोटी, हाथ चपटे, हथेली तथा पैर मोटे एवं भद्दे, मुँह खुला, नेत्र तिरछे,
जिह्वा मोटी एवं मस्तिष्क असामान्य होता है। ऐसे व्यक्ति को मंगोलियन मूर्ख कहते हैं, जिसकी 8-12 वर्ष बाद मृत्यु हो जाती है।
बिन्दु उत्परिवर्तन क्या है ? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर – बिन्दु उत्परिवर्तन (Point Mutation) - जीन उत्परिवर्तन जिसमें एकल नाइट्रोजन क्षारक का प्रतिस्थापन (Substitution), विलोपन (Deletion) या निवेशन (Insertion) होता है, उसे बिन्दु उत्परिवर्तन कहते हैं। जीन उत्परिवर्तन DNA द्विगुणन के समय होते हैं, जब इसमें नई न्यूक्लियोटाइड शृंखलाओं का निर्माण होता है अर्थात् DNA रज्जुक संश्लेषित होते हैं। उदाहरण के लिये, मनुष्य में दात्र कोशिका अरक्तता (Sickle cell anaemia) रोग DNA के एक नाइट्रोजन क्षार के परिवर्तन के कारण हो जाता है।
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