(1) शुक्राणु के प्रवेश से ही अण्डाणु सक्रिय होता है।
(2) निषेचन झिल्ली का निर्माण होता है, जिससे अन्य शुक्राणु अन्दर प्रवेश न कर सकें। मनुष्य में निषेचन
झिल्ली का निर्माण नहीं होता है।
(3) निषेचन द्वारा गुणसूत्र की संख्या द्विगुणित हो जाती है
(4) यह आनुवंशिक लक्षणों को धारण करता है।
(5) विभिन्न जीव जातियों में भिन्नताएँ निषेचन द्वारा होती हैं।
(6) निषेचन के द्वारा अण्डे में घूर्णन होता है।
(7) अण्डाणु में सेन्ट्रिओल नहीं पाया जाता है, जिसे शुक्राणु से प्राप्त करता है एवं बार-बार विभाजित
होता है।
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