उत्तर – वायु प्रदूषण – वायुमण्डल में होने वाले ऐसे परिवर्तन जिनसे जीवों का नुकसान हो वायु
प्रदूषण कहलाता है। यह मुख्यत: दहन क्रियाओं, औद्योगिक गतिविधियों, कृषि कार्यों में कीटनाशकों के प्रयोगों
तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण होता है।
उत्तर – वायु प्रदूषण के प्रभाव - वायु प्रदूषण हमारे शरीर में तरह-तरह की विकृतियाँ पैदा करता है।
इसके कुछ हानिकारक प्रभाव निम्नलिखित हैं—(1) कारखानों की चिमनियों से निकलने वाली SO, श्वास नली
में जलन पैदा करती है तथा फेफड़ों को हानि पहुँचाती है। यह विभिन्न प्रकार के पौधों को क्षतिग्रस्त कर देती है।
कुछ अधिपादप एवं लाइकेन SO, से स्वतंत्र माध्यम में बहुत तीव्रता से बढ़ते हैं। जन्तुओं में इसका प्रभाव श्वसन
क्रिया पर सबसे अधिक पड़ता है। (2) नाइट्रस ऑक्साइड से फेफड़ों, आँखों व हृदय के रोग तथा ओजोन से
आँख के रोग, खाँसी एवं सीने में दर्द होने लगता है। यह कई पौधों में वाष्पोत्सर्जन की दर बढ़ाकर भी उन्हें
नुकसान पहुँचाती है। (3) P.A.N. प्रकाश प्रतिक्रिया में प्रकाशीय जल-अपघटन को रोककर, परितन्त्र का
उत्पादन कम कर देती है। यह आँखों में जलन पैदा करके फेफड़ों को क्षति पहुँचाती है।
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